देश का 28 वाँ राज्य झारखण्ड का गठन राज्य की करीब 3 करोड़ की जनता के
साथ एक तरह का ब्लैक मेलिंग ही था। राज्य गठन की मांग अवश्य ही झारखंडी
जनता के सपनो को साकार करने का सबसे सुनहरा अवसर हो सकता है, लेकिन झारखंडी
जनता की भावनाओ और उनके उम्मीदों को रात के अँधेरे में चुपचाप राजनीति के नफा नुकसान के लिए शपथ ग्रहण समारोह राज्य की जनता के लिए विशुद्ध रूप से ब्लैक मेलिंग ही कहा जायेगा।
ब्लैक मेलिंग इस माईने
में की राज्य की जनता ने जो जनादेश दिया था वो एकीकृत बिहार सरकार के गठन
के लिए था न की नए राज्य झारखण्ड के लिए। फिर भी केंद्र में बैठी भाजपा की
अटल बिहारी सरकारी ने बहुत ही चालाकी से जनता का बगैर नया जनादेश लिए अपनी
पार्टी की सरकार रातो रात थोप दी। उस काली रात से लेकर आजतक यहाँ की जनता
हर पल हर वक़्त और हर एक बार सिर्फ और सिर्फ ब्लैक मेल ही हुई है।
बाबूलाल
की सरकार ने भले ही राज्य की जनता की दिल जीतने की पुर जोर कोशिश की हो
लेकिन यह कोशिश भी कहीं न कहीं जनता के साथ एक ब्लैक मेलिंग ही थी। क्यूंकि
राज्य अलग होने के साथ ही बाबूलाल और अर्जुन मुंडा की राहें हर किसी को
नज़र आने लगी थी और बाबूलाल ने भी कुर्सी सँभालते ही अपनी एक अलग लकीर खींच
उन तमाम लोगों के दिल के साथ ब्लैक मेलिंग किया जिसने भी उनके साथ राज्य के
विकास के सुनहरे ख्वाब बुने थे।
बाबूलाल अर्जुन शिबू
और कोड़ा बारह वर्षों में ये चार कंधे जरुर बदले लेकिन हर एक कंधे ने सचमुच
इस राज्य को कन्धा ही दिया। इस बदनसीब राज्य को एक पांचवा कन्धा भी मिला जो
534 दिनों (आजतक ) तक इसे अनाथ की तरह पाला लेकिन जैसे एक अनाथ को पालने
वाला अनाथ के साथ अक्सर ब्लैक मेलिंग ही करता है यहाँ यह पांचवा खुद को
महामहिम कह भी वही कर रहा है। हालाँकि इस राज्य पर तीन टर्म में सबसे अधिक
दिनों (2130 दिन) तक राज करने वाले अर्जुन मुंडा की दरबार से जो कुछ भी
विकास की धारा बही वह सराइकेला और खरसावाँ तक पहुँचते पहुँचते सुख गयी।
अर्जुन मुंडा ने साफ़ कर दिया की वो राज्य की जनता के विकास का माला जप कर
उन्हें सिर्फ ब्लैक मेल ही कर रहे हैं। शायद अर्जुन मुंडा की यही ब्लैक
मेलिंग हर बार उन्हें कुर्सी से उतार फेकी लेकिन समय के साथ न बदलते हुए
अपने क्षेत्र तक सिमटना ही अर्जुन मुंडा को अबतक सिमटाकर ही रखा है। इसलिए
तो भाजपा जब देश के लिए पार्टी के होनहारों की लिस्ट तैयार करती है तो
झारखण्ड के नेताओं के नाम ढूंढने से भी नहीं मिलते हैं।
राज्य की जनता के साथ सुदेश महतो ने भी कम ब्लैक मेलिंग नहीं की है। जाती बिरादरी और विकास के नाम पर हर बार वोट समेटते रहे लेकिन विकास सिर्फ खुद का और पार्टी का हुआ। झारखण्ड में बनने वाली हर उस सरकार को सहारा दिया जो तीन टांगो पर बनी। और इसी सहारे की दुहाई देकर खुद को मजबूत कर जनता को ब्लैक मेल किया।
राज्य की जनता के साथ सुदेश महतो ने भी कम ब्लैक मेलिंग नहीं की है। जाती बिरादरी और विकास के नाम पर हर बार वोट समेटते रहे लेकिन विकास सिर्फ खुद का और पार्टी का हुआ। झारखण्ड में बनने वाली हर उस सरकार को सहारा दिया जो तीन टांगो पर बनी। और इसी सहारे की दुहाई देकर खुद को मजबूत कर जनता को ब्लैक मेल किया।
खुद को आदिवासियों का देवता और संथाल का मसीहा मानने वाले शिबू सोरेन भी इस राज्य की जनता को ठीक वैसे ही ब्लैक मेल किये जैसे हर किसी ने अपनी कूबत के अनुसार किया। जिस शिबू के सिर्फ नाम और तस्वीर पर संथाल की जनता जान तक लुटा देने को आतुर हो जाती थी शिबू ने उन्ही जनता के साथ ब्लैक मेलिंग की। परिवार के आगे अपने दमदार लोगों को खोया और जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ किया।
हर बार अपने स्वार्थ को देखकर सरकार बनायीं और फिर स्वार्थ के लिए गिराई
भी। शिबू के धीरे धीरे पार्टी पर पकड़ कम पड़ने का ही असर है की एक के बाद एक
पुराने नेता झामुमो से मुख मोड़ रहे हैं।
लेकिन बीते हुए इन ब्लैकमेलरों से चार कदम आगे अगर झामुमो और इस राज्य की जनता के साथ सभी सीमाएं लांघकर कोई ब्लैक मेल कर रहा है तो वो है कोंग्रेस। पहले लालच और सीबीआई की धमकी के साथ मुंडा से तालाक करवाने के बाद भी खुद से गंठजोड़ न कर राज्य को एक अनाथ की तरह रहने को मजबूर करने में कोंग्रेस सबसे बड़ा ब्लैक मेलर साबित हुआ है।
अब झारखण्ड में सरकार बनने के जितने भी बादल बचे थे वे लगभग छंट चुके हैं, और चुनाव की किरण फूटने ही वाली है। तो अबतक बारह वर्षों में जितने भी दफे आप ब्लैक मेल हुए या आपके साथ ब्लैक मेलिंग हुई। उसका हिसाब चुकता करने का समय आ चूका है। तो फिर कमर कस लीजिये। लेकिन हाँ इसबार हिसाब थोड़ा हिसाब से होना चाहिए कहीं फिर ऐसा हिसाब न हो जाये जिससे ब्लैक मेलर को फिर से ब्लैक मेलिंग का मौका मिल जाये। जोहार !